चंडीगढ़, 29 अप्रैल— हरियाणा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को नई ऊर्जा देने की दिशा में हरियाणा कला परिषद् ने एक महत्वाकांक्षी पहल की शुरुआत की है। परिषद् के निदेशक विवेक कालिया ने बताया कि परिषद् प्रदेश की लोक परंपराओं को न केवल संरक्षित करने बल्कि उन्हें नई पीढ़ी तक सजीव रूप में पहुंचाने के लिए निरंतर सक्रिय है।
उन्होंने कहा कि हरियाणा की लोक कलाएं—जैसे लोक नृत्य, लोक गीत और लोक नाटक—प्रदेश की आत्मा हैं, जिन्हें समय के साथ सहेजना और आगे बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए परिषद् द्वारा एक व्यापक प्रचार अभियान चलाया जा रहा है, जिसके माध्यम से पारंपरिक कलाओं को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
श्री कालिया ने आगे बताया कि परिषद् की यह पहल केवल संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम भी बनेगी। जब बच्चे इन लोक कलाओं से जुड़ेंगे, तो वे न केवल अपनी सांस्कृतिक पहचान को समझेंगे, बल्कि उनमें रचनात्मकता और आत्मविश्वास का भी विकास होगा।
इसी कड़ी में, आगामी ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान बच्चों के लिए विशेष रचनात्मक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इन कार्यक्रमों में चित्रकला, रंगमंच, लोक नृत्य और अन्य कलात्मक विधाओं के माध्यम से बच्चों को अपनी प्रतिभा को निखारने और मंच पर प्रस्तुत करने का सुनहरा अवसर मिलेगा। यह आयोजन न केवल मनोरंजन का साधन होगा, बल्कि बच्चों के सर्वांगीण विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी साबित होगा।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि परिषद् द्वारा जल्द ही एक डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किया जाएगा, जहां कलाकार अपनी प्रस्तुतियों के लिए आवेदन कर सकेंगे। चयनित कलाकारों को प्रस्तुति हेतु अग्रिम राशि प्रदान की जाएगी, जिससे वे बेहतर तैयारी और गुणवत्ता के साथ अपनी कला का प्रदर्शन कर सकें। यह पहल कलाकारों के लिए प्रोत्साहन का कार्य करेगी और उन्हें आर्थिक एवं रचनात्मक सहयोग प्रदान करेगी।
श्री कालिया ने विश्वास व्यक्त किया कि हरियाणा कला परिषद् का यह अभियान प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर को नई पहचान दिलाने के साथ-साथ युवा प्रतिभाओं को एक मजबूत मंच प्रदान करेगा। यह प्रयास हरियाणा की लोक कलाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित करने में भी सहायक सिद्ध होगा।









