संशोधित रिजल्ट से बाहर हुए शिक्षकों को हाईकोर्ट से राहत 

Published On: June 9, 2026
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चंडीगढ़: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने संशोधित परिणाम जारी होने के बाद चयन सूची से बाहर किए गए दो शिक्षकों को अंतरिम राहत देते हुए उनकी सेवाओं की स्थिति यथावत बनाए रखने का आदेश दिया है।

न्यायमूर्ति मनीषा बत्रा ने यह अंतरिम आदेश शिक्षिका पिंकी और एक अन्य शिक्षक द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। याचिकाकर्ताओं ने राज्य सरकार और अन्य पक्षों के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया था।

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याचिका में कहा गया कि उन्होंने सामान्य श्रेणी के तहत टीजीटी (अंग्रेजी) पद के लिए आवेदन किया था और सभी आवश्यक योग्यताएं पूरी करने के बाद लिखित परीक्षा में 64.6 अंक हासिल किए थे। इसके आधार पर उनका चयन हुआ और उन्हें नियुक्ति पत्र जारी किए गए। दोनों शिक्षकों ने 29 जुलाई 2024 को अपनी सेवाएं भी जॉइन कर ली थीं।

विवाद तब पैदा हुआ जब 28 मई 2026 को भर्ती का संशोधित परिणाम जारी किया गया। याचिकाकर्ताओं के अनुसार नई चयन सूची में अंतिम चयनित उम्मीदवार के भी 64.6 अंक थे। ऐसे में समान अंक होने की स्थिति में आयु के आधार पर वरीयता तय की गई, जिसके कारण उन्हें चयन क्षेत्र (सेलेक्शन जोन) से बाहर कर दिया गया।

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याचिकाकर्ताओं ने अदालत में दलील दी कि वे लगभग दो वर्षों से सेवा दे रहे हैं और इतनी लंबी अवधि के बाद संशोधित परिणाम के आधार पर उन्हें हटाना अनुचित होगा।

मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई तक उनकी सेवाओं की स्थिति यथावत बनाए रखने का आदेश दिया है। इससे दोनों शिक्षकों को फिलहाल राहत मिल गई है और उनकी नौकरी पर तत्काल कोई असर नहीं पड़ेगा।

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