145 करोड़ के नगर निगम घोटाले में ED का बड़ा एक्शन, पूर्व बैंक अधिकारी गिरफ्तार

Published On: June 2, 2026
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Panchkula Bank Scam: पंचकूला नगर निगम के 145 करोड़ रुपये के कथित घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कोटक महिंद्रा बैंक के पूर्व डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट पुष्पिंदर सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। जांच एजेंसी का दावा है कि वह इस पूरे घोटाले का मुख्य सूत्रधार है और सरकारी धन की हेराफेरी में उसकी अहम भूमिका रही है।

पुष्पिंदर सिंह 9 जून तक ईडी की हिरासत में 

सोमवार को हुई गिरफ्तारी के बाद विशेष PMLA अदालत ने पुष्पिंदर सिंह को 9 जून तक ED की हिरासत में भेज दिया। एजेंसी अब उससे पूछताछ कर घोटाले में शामिल अन्य लोगों और पैसों के अंतिम लाभार्थियों का पता लगाने में जुटी है।

यह मामला पंचकूला नगर निगम के खातों से करोड़ों रुपये की कथित हेराफेरी से जुड़ा है। इससे पहले हरियाणा के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने बैंक अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि बैंक अधिकारियों और कुछ अन्य लोगों ने मिलकर सुनियोजित तरीके से नगर निगम के 145 करोड़ रुपये का गबन किया।

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खातों को खोलने के लिए फर्जी दस्तावेज का इस्तेमाल 

ED की जांच में सामने आया है कि नगर निगम के नाम पर कथित तौर पर दो अनधिकृत बैंक खाते खोले गए थे। आरोप है कि इन खातों को खोलने के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। बाद में नगर निगम के असली खातों में मौजूद धन को फर्जी पत्रों के जरिए इन खातों में स्थानांतरित कर दिया गया।

जांच एजेंसी के अनुसार, उस समय बैंक में कस्टमर रिलेशनशिप मैनेजर रहे दिलीप कुमार राघव, तत्कालीन डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट पुष्पिंदर सिंह और नगर निगम के पूर्व वरिष्ठ लेखा अधिकारी विकास कौशिक ने मिलकर इस पूरी प्रक्रिया को अंजाम दिया।

ED का दावा है कि फर्जी खातों में पहुंची रकम को बाद में कई लोगों के खातों में भेजा गया। इनमें रजत दहरा, स्वाति तोमर, कपिल कुमार और विनोद कुमार के नाम प्रमुख रूप से सामने आए हैं। जांच में यह भी पाया गया कि इन खातों के जरिए हुए कई वित्तीय लेन-देन पर पुष्पिंदर सिंह का प्रभाव और नियंत्रण था।

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बैंक अधिकारियों, नगर निगम कर्मचारियों और कुछ निजी लोगों की मिलीभगत

एजेंसी के अनुसार, हेराफेरी की गई रकम का एक हिस्सा बाद में विभिन्न माध्यमों से पुष्पिंदर सिंह और उनकी पत्नी प्रीति ठाकुर तक पहुंचा। कुछ धनराशि रियल एस्टेट कंपनियों और अन्य निजी व्यक्तियों को भी भेजी गई। ED का आरोप है कि इन ट्रांजैक्शनों के पीछे भी पुष्पिंदर सिंह के निर्देश काम कर रहे थे।

जांच एजेंसी का कहना है कि बैंक अधिकारियों, नगर निगम कर्मचारियों और कुछ निजी व्यक्तियों के बीच मिलीभगत के सबूत मिले हैं। अब पूरे पैसों के प्रवाह और घोटाले से लाभ उठाने वाले अन्य लोगों की पहचान की जा रही है।

ED का मानना है कि यह सरकारी धन की सुनियोजित हेराफेरी का मामला है और आने वाले दिनों में जांच के दौरान कई और महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं।

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प्रमुख बातें

  • 145 करोड़ रुपये के कथित घोटाले में ED की कार्रवाई।
  • कोटक महिंद्रा बैंक के पूर्व डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट पुष्पिंदर सिंह गिरफ्तार।
  • 9 जून तक ED की रिमांड मंजूर।
  • नगर निगम के नाम पर कथित रूप से फर्जी बैंक खाते खोले गए।
  • सरकारी धन को अवैध खातों में ट्रांसफर करने का आरोप।
  • कई लोगों और कंपनियों तक पहुंची घोटाले की रकम।
  • ED मनी ट्रेल और अन्य आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है।

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