हरियाणा में NCR दायरा घटाने की तैयारी, कई जिले बाहर हो सकते हैं

Published On: June 9, 2026
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गुरुग्राम: हरियाणा के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में बड़े बदलाव की तैयारी चल रही है। प्रस्तावित योजना के तहत राज्य का NCR दायरा लगभग 60 प्रतिशत तक घटाया जा सकता है, जिससे पानीपत, करनाल, जींद, महेंद्रगढ़ और भिवानी जैसे जिलों के बड़े हिस्से एनसीआर से बाहर हो सकते हैं। इस पर अंतिम निर्णय 16 जून को होने वाली NCR Planning Board (NCRPB) की बैठक में लिया जा सकता है।

100 किमी दायरे पर आधारित नया प्रस्ताव

ड्राफ्ट रीजनल प्लान-2041 के अनुसार NCR की सीमा को दिल्ली के राजघाट से लगभग 100 किलोमीटर के रेडियस तक सीमित करने का प्रस्ताव है। इसी आधार पर हरियाणा के कई जिले प्रभावित हो सकते हैं।

हरियाणा का मौजूदा रुख यह है कि NCR में केवल वही क्षेत्र शामिल किए जाएं जो पूरी तरह इस 100 किलोमीटर के दायरे में आते हैं।

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किन जिलों पर सबसे ज्यादा असर?

प्रस्ताव लागू होने पर हरियाणा के कई जिलों की स्थिति बदल सकती है:

  • करनाल: दिल्ली से 113–121 किमी दूर, अधिकांश हिस्सा बाहर
  • महेंद्रगढ़: लगभग पूरा जिला NCR से बाहर होने की संभावना
  • जींद: सीमा पर स्थित, बड़ा हिस्सा बाहर जा सकता है
  • पानीपत: शहर आंशिक रूप से बच सकता है, लेकिन जिला प्रभावित
  • भिवानी: कुछ क्षेत्र शामिल, कुछ बाहर
  • चरखी दादरी: अपेक्षाकृत सुरक्षित, आंशिक बदलाव संभव

हाईवे कॉरिडोर से आंशिक राहत

हरियाणा सरकार ने 11 राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे 1 किलोमीटर के कॉरिडोर को NCR में बनाए रखने का सुझाव दिया है। इससे कुछ शहरों को राहत मिल सकती है:

  • NH-44 पर स्थित करनाल और पानीपत को आंशिक सुरक्षा मिल सकती है
  • NH-148B और NH-334B के कारण भिवानी और चरखी दादरी को कुछ लाभ
  • लेकिन जींद और महेंद्रगढ़ जैसे जिले इस सुविधा से बाहर रह सकते हैं

NCR से बाहर होने के बड़े असर

यदि प्रस्ताव लागू होता है तो संबंधित क्षेत्रों पर कई प्रभाव पड़ सकते हैं:

संशोधित रिजल्ट से बाहर हुए शिक्षकों को हाईकोर्ट से राहत 
  • NCR विकास योजनाओं और फंडिंग से दूरी
  • बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में कमी
  • भूमि और प्रॉपर्टी की कीमतों पर असर
  • RRTS और अन्य रेल/मेट्रो योजनाओं का सीमित विस्तार

वर्तमान स्थिति

हरियाणा के अभी 14 जिले NCR में शामिल हैं, लेकिन प्रस्तावित बदलाव के बाद यह संख्या काफी घट सकती है। इससे राज्य के शहरी विकास, निवेश और रियल एस्टेट सेक्टर पर गहरा असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।

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