Haryana: हरियाणा की तहसीलों में दलालों और भ्रष्टाचार पर लगेगा अंकुश, पासपोर्ट सेवा केंद्र की तर्ज पर होगी रजिस्ट्री

Published On: June 11, 2026
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Haryana News: हरियाणा की तहसीलों में वर्षों से चली आ रही दलाली, भ्रष्टाचार और फाइलों की अनावश्यक देरी को खत्म करने की दिशा में राज्य सरकार बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रही है। यदि प्रस्तावित नई व्यवस्था को मंजूरी मिलती है तो जमीन, मकान और दुकानों की रजिस्ट्रियां अब अधिक पारदर्शी, समयबद्ध और डिजिटल तरीके से हो सकेंगी।

राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री विपुल गोयल ने तहसीलों की कार्यप्रणाली में व्यापक सुधार का प्रस्ताव तैयार कर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के समक्ष भेजा है। प्रस्ताव में रजिस्ट्री प्रक्रिया को पासपोर्ट सेवा केंद्र और वीजा कार्यालयों की तर्ज पर संचालित करने की योजना बनाई गई है।

टोकन और अपॉइंटमेंट सिस्टम से होगी रजिस्ट्री

नई व्यवस्था के तहत तहसीलों में विशेष सेवा काउंटर स्थापित किए जाएंगे, जहां आवेदकों को निर्धारित समय के अनुसार टोकन जारी किया जाएगा। इसके बाद अलग-अलग काउंटरों पर रजिस्ट्री से जुड़ी सभी प्रक्रियाएं चरणबद्ध तरीके से पूरी होंगी।

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पूरी प्रक्रिया डिजिटल प्लेटफॉर्म से संचालित होगी, जिससे मानव हस्तक्षेप कम होगा और भ्रष्टाचार की संभावनाओं पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा। साथ ही आवेदकों को बार-बार तहसील के चक्कर लगाने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी।

वर्षों से विवादों में रही हैं तहसीलें

राज्य की कई तहसीलें लंबे समय से दलालों के प्रभाव, कथित रिश्वतखोरी और फर्जी रजिस्ट्रियों के आरोपों को लेकर चर्चा में रही हैं। आम नागरिकों की शिकायत रही है कि बिना बिचौलियों की मदद के रजिस्ट्री प्रक्रिया पूरी करना मुश्किल होता है।

पिछले कुछ वर्षों में कई मामलों में राजस्व अधिकारियों, रजिस्ट्री क्लर्कों, नायब तहसीलदारों और तहसीलदारों पर अनियमितताओं के आरोप लगे। कोरोना काल के दौरान भी जमीनों की खरीद-फरोख्त और रजिस्ट्रियों में गड़बड़ियों के कई मामले सामने आए थे, जिनकी जांच के बाद विभागीय कार्रवाई की सिफारिशें की गई थीं।

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फाइल की रियल टाइम ट्रैकिंग होगी संभव

प्रस्तावित मॉडल के लागू होने के बाद प्रत्येक आवेदन की डिजिटल निगरानी की जा सकेगी। आवेदक यह जान सकेगा कि उसकी फाइल किस स्तर पर लंबित है और उसे सेवा मिलने में कितना समय लगेगा।

सरकार का मानना है कि इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि लोगों का समय और पैसा भी बचेगा। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह होगा कि रजिस्ट्री प्रक्रिया व्यक्ति आधारित न रहकर सिस्टम आधारित हो जाएगी।

गुरुग्राम या फरीदाबाद से हो सकती है शुरुआत

सूत्रों के अनुसार नई व्यवस्था को पहले पायलट प्रोजेक्ट के रूप में गुरुग्राम या फरीदाबाद जिले की किसी तहसील में लागू किया जा सकता है। वहां सफलता मिलने के बाद इसे पूरे हरियाणा में विस्तार दिया जाएगा।

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यदि यह मॉडल सफल रहता है तो हरियाणा देश का पहला राज्य बन सकता है जहां रजिस्ट्री प्रक्रिया पूरी तरह सेवा-केंद्र आधारित, डिजिटल और पारदर्शी प्रणाली के तहत संचालित होगी।

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