Haryana: हरियाणा के मछली पालकों के लिए बड़ी खुशखबरी, अब 40 दिन में मिलेगी सब्सिडी

Published On: March 23, 2026
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Big news for fish farmers of Haryana

Haryana: हरियाणा के मछली पालकों के लिए बड़ी खुशखबरी आई है। हरियाणा के मत्स्य पालन कर रहे या करने की योजना बना रहे किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। प्रदेश सरकार ने मत्स्य पालन व्यवसाय को सुगम बनाने और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। अब मछली पालन से जुड़ी सरकारी हरियाणा मत्स्य पालन सब्सिडी और सुविधाओं के लिए किसानों को सरकारी दफ्तरों के धक्के नहीं खाने पड़ेंगे।

मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की ओर से जारी ताजा अधिसूचना के मुताबिक, मत्स्य पालन विभाग की 11 अहम सेवाओं को हरियाणा सेवा का अधिकार अधिनियम 2014 के दायरे में ला दिया गया है। सरकार ने साफ कर दिया है कि अब अधिकारियों को एक तय समय-सीमा के भीतर ही किसानों के आवेदनों का निपटारा करना होगा।

सघन मत्स्य पालन विकास कार्यक्रम के तहत अब किसानों को बड़ी प्रशासनिक राहत दी गई है। मछली या मत्स्य उत्पादों की ढुलाई के लिए खरीदे जाने वाले लोडिंग ऑटो, चारपहिया वाहन और ट्रॉली युक्त मिनी ट्रैक्टरों पर सब्सिडी की राशि अब आवेदन के मात्र 40 दिनों के भीतर मंजूर करनी होगी।

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इससे पहले किसानों को अपनी फाइलें पास कराने के लिए महीनों तक इंतजार करना पड़ता था, जिससे उनका रोजमर्रा का काम प्रभावित होता था। लेकिन नई व्यवस्था लागू होने से सब्सिडी का पैसा सीधे और तय समय पर किसानों के खातों तक पहुंचने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।

सरकार का फोकस केवल पारंपरिक मछली पालन तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत आधुनिक तकनीकों को भी तेज रफ्तार के साथ लागू करना है। नई अधिसूचना के अनुसार, न्यूक्लियस प्रजनन केंद्रों (NBC) की स्थापना, स्टार्टअप्स, इन्क्यूबेटर्स और पायलट प्रोजेक्ट्स के लिए मिलने वाली आर्थिक मदद की समय सीमा भी तय कर दी गई है।

इसके अलावा, ताजे पानी की सजावटी मछलियों (Ornamental Fish) के प्रजनन, कोल्ड स्टोरेज के आधुनिकीकरण और ई-मार्केटिंग प्लेटफॉर्म तैयार करने के लिए मिलने वाली सब्सिडी अब हर हाल में 50 दिनों के भीतर प्रदान की जाएगी। झींगा और मछली फसल बीमा के प्रीमियम पर भी वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित की गई है।

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प्रशासनिक कामकाज में पूरी पारदर्शिता और तेजी लाने के लिए सरकार ने एक सख्त त्रि-स्तरीय निगरानी तंत्र लागू किया है। इसके तहत जिले में मौजूद मत्स्य पालन अधिकारी (DFO) को पदनामित अधिकारी के रूप में प्राथमिक जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिन्हें सबसे पहले फाइल क्लियर करनी होगी।

यदि जमीनी स्तर पर किसान का काम तय 40 या 50 दिनों में नहीं होता है, तो वह संबंधित उपनिदेशक (मत्स्य पालन) के पास प्रथम अपीलीय अधिकारी के तौर पर शिकायत कर सकेगा। वहीं, द्वितीय अपीलीय अधिकारी के रूप में सीधे निदेशक (मत्स्य पालन) को जवाबदेह बनाया गया है ताकि किसी भी स्तर पर काम न रुके।

मुख्य सचिव ने अपने आदेशों में स्पष्ट किया है कि समय-सीमा का उल्लंघन होने पर संबंधित अधिकारी को सेवा के अधिकार अधिनियम के तहत भारी जुर्माना और विभागीय कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। सरकार के इस सख्त रवैये से विभागीय लालफीताशाही पर सीधा प्रहार होगा।

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राज्य सरकार की इस नई व्यवस्था से न केवल मछली पालकों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी, बल्कि प्रदेश में मत्स्य निर्यात और मूल्य संवर्धन (Value Addition) को भी भारी बढ़ावा मिलेगा। सरकार मछली उत्पादों की बिक्री के लिए ई-ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म और कोल्ड चैन इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने पर भी जोर दे रही है।

मत्स्य विभाग के विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशासनिक स्तर पर हुए इस बड़े सुधार से हरियाणा के शिक्षित युवाओं का रुझान इस व्यवसाय की ओर तेजी से बढ़ेगा। यह कदम राज्य की अर्थव्यवस्था और जीडीपी में कृषि व संबद्ध क्षेत्रों के योगदान को एक नई और टिकाऊ मजबूती प्रदान करेगा।

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