चंडीगढ़: हरियाणा में सरकारी नौकरी करने वाले दंपतियों को बड़ा झटका लगा है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सरकारी नौकरी करने वाले पति-पत्नी को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अगर पति-पत्नी एक ही शहर में तैनात हैं और एक ही घर में रह रहे हैं, तो दोनों को अलग-अलग हाउस रेंट अलाउंस (HRA) नहीं दिया जा सकता।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद हरियाणा सरकार ने तमाम सरकारी विभागों, बोडों और यूनिवसर्टीज को नियमों का सख्ती से पालन करने के निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने कहा कि HRA का उद्देश्य किराए के मकान पर होने वाले खर्च की भरपाई करना है, न कि ज्यादा लाभ देना है।
इस मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सुशील सिंगला की ओर से दायर उस याचिका को खारिज कर दिया। जिसमें याचिकाकर्ता का कहना था कि उनकी पत्नी एक बैंक में कार्यरत हैं, जबकि वे अलग सरकारी संस्थान में कार्यरत हैं। दोनों अलग-अलग संस्थानों में सेवाएं दे रहे हैं, इसलिए दोनों HRA के हकदार हैं। हालांकि संबंधित निगम ने उनका HRA यह कहते हुए रोक दिया था कि उनकी पत्नी को पहले से सरकारी आवास की सुविधा मिली हुई है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब पति-पत्नी एक ही घर में रह रहे हों, फिर एक ही मकान में रह के लिए दो अलग-अलग HRA लेना नियमों की मूल भावना के खिलाफ है और इसे अनुचित लाभ माना जाएगा।









