Haryana: हरियाणा में इन तारीखों को लगेगा ‘जलसा-ए-आम’ जन सम्मेलन, सरकार सुनेगी आपकी शिकायत

Published On: January 8, 2026
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Public meeting will be held on these dates

Haryana: हरियाणा वासियों के लिए बड़ी खुशखबरी आई है। जलसा-ए-आम ये किसी आने वाली फिल्म का नाम नहीं है। ये प्रदेश में एक से बढक़र एक कर रही सैनी सरकार का बेहतरीन कारनामा है। हरियाणा प्रदेश में सबसे ज्यादा शिकायत राजस्व विभाग से संबंधित है। इस विभाग की प्रतिदिन कोई न कोई शिकायत होती है। अब हरियाणा की इस नायब सरकार ने इसका भी तोड़ निकाल लिया है।

प्रदेश में (रजिस्ट्री के बाद भूमि रिकार्ड में नए मालिक का नाम दर्ज करना-इंतकाल) से जुड़े हजारों लंबित मामलों को निपटाने के लिए हरियाणा की सैनी सरकार ने राज्यव्यापी अभियान ‘जलसा-ए-आम’ शुरू किया है। इस महीने प्रत्येक शनिवार यानी 10 जनवरी , 17 जनवरी, 24 जनवरी और 31 जनवरी को जन सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे ताकि म्यूटेशन मामलों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जा सके।

आपको बता दें कि राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्तायुक्त डॉ. सुमिता मिश्रा ने वीरवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिला के उपायुक्तों के साथ बैठक में कहा कि वर्तमान में प्रदेश में म्यूटेशन के एक लाख 89 हजार 635 आवेदन प्रक्रियाधीन हैं। 10 दिन से अधिक समय से लंबित 50 हजार 794 मामलों को प्राथमिकता से निपटाया जाए। फरीदाबाद, पलवल और अंबाला पर विशेष फोकस रहेगा।

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आटो म्यूटेशन की दिशा में हरियाणा प्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रत्येक सहायक कलेक्टर (द्वितीय श्रेणी) को प्रति माह न्यूनतम 12 भूमि विभाजन मामलों और कम कार्यभार वाले तहसीलदारों को प्रति माह 20 मामलों को निपटाने का लक्ष्य दिया गया है। जिला, मंडल और राज्य स्तर पर मासिक समीक्षा की जाएगी।

वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र शुरू किया जाएगा, जिसके अंतर्गत सेवानिवृत्त राजस्व अधिकारियों को अनुबंध के आधार पर गांव-स्तरीय शिविरों में सहमति-आधारित समाधान हेतु नियुक्त किया जाएगा। प्रत्येक सफलतापूर्वक सुलझे मामले पर 10 हजार रुपये का मानदेय स्वीकृत किया गया है, जिसे विवादित पक्षकारों द्वारा समान रूप से साझा किया जाएगा। उपायुक्तों को अधिक संख्या में लंबित राजस्व मामलों वाले गांवों में शिविर लगाने हेतु सेवानिवृत्त राजस्व अधिकारियों को पैनल में शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं।’

हरियाणा प्रदेश में 60 लाख भूमि अभिलेखों का डिजिटलीकरण किया जा चुका है। अभी तक 83 हजार 379 संपत्ति विलेख पेपरलेस मोड में पंजीकृत किए जा चुके हैं। कुल एक लाख 17 हजार 931 विलेखों में से 90 हजार 711 को स्वीकृति मिली है, जो 76.9 प्रतिशत की स्वीकृति दर दर्शाता है। जिन पंजीकरण मामलों को दो से अधिक बार वापस किया गया है, उन्हें समयबद्ध समाधान के लिए स्वत: वरिष्ठ अधिकारियों को भेजा जाएगा।

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राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्तायुक्त डॉ. मिश्रा ने बताया कि 6351 जियो-रेफरेंस्ड गांवों में 60.43 लाख ततिमा रिकॉर्ड पूरे किए जा चुके हैं। महेंद्रगढ़ में 99.7 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है। भिवानी और जींद जिलों में क्रमश: 3.82 लाख और 4.28 लाख रिकार्ड पूरे किए जा चुके हैं। शेष जिलों को 31 जनवरी तक कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं।एग्रीस्टैक के तहत 98 लाख से अधिक किसानों के लिए डेटा बकेट तैयार किए जा चुके हैं, जिनमें से 5.12 लाख नामांकन पूरे हो चुके हैं।

अगले महीने होगा पूरा

हरियाणा और यूपी के बीच सीमा विवाद खत्म करने के लिए 1221 स्तंभ लगाए जाने हैं। इनमें से 535 सीमा स्तंभ अब तक स्थापित किए जा चुके हैं। सोनीपत जिले में 74.6 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है। इसके बाद पलवल और करनाल जिले हैं। शेष कार्य 18 फरवरी 2026 तक पूर्ण करने के आर्देश कर दिए हैं।

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