चंडीगढ़: हरियाणा सरकार अब ग्रामीणों को गांव की टूटी-फूटी सड़कों से निजात देने की तैयारी में है। सीएम नायब सिंह सैनी ने सीएमओ अधिकारियों को इस पूरे मामले पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं। अगर यह प्रस्ताव मंजूर हो जाता है तो गांवों की सड़क व्यवस्था का ढांचा बदलने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क चौड़ाई और निर्माण गुणवत्ता के नए मानक भी लागू हो सकते हैं।
सबसे बड़ा बदलाव यह होगा कि पीडब्ल्यूडी के अधीन आने के बाद पांच करम तक की सड़कें कम से कम 18 फुट चौड़ी विकसित की जा सकेंगी। इससे गांवों की कनेक्टिविटी मजबूत होगी और यातायात ज्यादा सुरक्षित और आसान बन सकेगा। किसानों को फसल मंडियों तक पहुंचाने में राहत मिलेगी, ट्रांसपोर्ट लागत घटेगी और गांवों तक विकास परियोजनाओं की पहुंच आसान होगी।
प्रदेश सरकार का कहना है कि अगर सड़क निर्माण, मरम्मत और रखरखाव का पूरा सिस्टम पीडब्ल्यूडी के अधीन आता है तो काम ज्यादा तेज और जवाबदेह तरीके से हो सकेगा। अभी हालात ऐसे हैं कि सड़क खराब होने पर ग्रामीणों को यह तक स्पष्ट नहीं होता कि शिकायत किस विभाग से करें। कई बार दोनों विभाग जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डालते रहते हैं। इसी वजह से सरकार अब ‘एक सड़क-एक विभाग’ मॉडल को समाधान के तौर पर देख रही है। यह बदलाव केवल सड़क ट्रांसफर तक सीमित नहीं रहेगा। सरकार इसके वित्तीय और प्रशासनिक प्रभावों का भी विस्तृत अध्ययन कर रही है।
गौरतलब है कि लंबे वक्त से हरियाणा के अधिकांश ग्रामीण इलाकों में सड़क निर्माण की बड़ी हुई जिम्मेदारी बड़ी समस्या बनी हुई है। कई गांवों में एक सड़क का आधा हिस्सा पीडब्ल्यूडी के पास होता है, जबकि बाकी हिस्सा मार्केटिंग बोर्ड के अधीन आता है। नतीजन यह है कि सड़क निर्माण और मरम्मत का काम समय पर पूरा ही नहीं हो पाता। कई बार पीडब्ल्यूडी अपने हिस्से की सड़क बना देता है, लेकिन जैसे ही मार्केटिंग बोर्ड का हिस्सा शुरू होता है, वहां काम रुक जाता है। बजट मंजूरी, टेंडर प्रक्रिया और फाइलों की लंबी दौड़ के कारण महीनों तक सड़कें अधूरी पड़ी रहती हैं। कहीं सड़क चमचमाती दिखती है तो कुछ मीटर आगे गड्ढों और टूटी परतों का साम्राज्य शुरू हो जाता है। मानसून के मौसम में तो हालात और अधिक खराब हो जाते हैं।









