Haryana: हरियाणा में इन किसानों को मिलेंगे गेहूं और सरसों के कम दाम, मंडी में कल से शुरू होगी खरीद

Published On: March 27, 2026
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These farmers in Haryana will get lower prices for wheat and mustard

Haryana: हरियाणा के किसानों के लिए बड़ी खबर सामने आ रही है। हरियाणा में शनिवार से सरसों की खरीद विधिवत रूप से शुरू होने जा रही है, जिसके लिए प्रदेश भर की मंडियों में तैयारियां तेज कर दी गई हैं। सरकार ने कड़े निर्देश दिए हैं कि खरीद के लिए सरसों में अधिकतम 8 % और गेहूं में 12 % नमी ही मान्य होगी, अगर इससे ज्यादा नमी होती है तो किसानों को फसलों के कम रेट मिलेगें।

हरियाणा में सरसों की खरीद को लेकर जहां खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री पुख्ता इंतजाम होने के दावे कर रहे हैं, वहीं किसान और आढ़ती अभी भी मंडियों की जमीनी व्यवस्था से नाखुश नजर आ रहे हैं।

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प्रदेश की 416 मंडियों में गेहूं और 110 मंडियों में सरसों की फसल खरीदी जाएगी। सरकार ने इस बार गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2585 रुपये और सरसों का 6200 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। नियमों के मुताबिक, गेहूं में 12 % से अधिक नमी मिलने पर कुल कीमत का एक % यानी 25.85 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से कम रेट मिलेगा। वहीं, 14 % तक नमी होने पर गेहूं बेचा गया तो रेट बढ़कर 2 % हो जाएगा।

मूल्य समर्थन योजना (PSS) के तहत इस बार प्रदेश में करीब 13.17 लाख मीट्रिक टन सरसों के उत्पादन का अनुमान लगाया गया है। हरियाणा के खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री राजेश नागर का कहना है कि वे खुद अलग-अलग मंडियों का दौरा कर व्यवस्थाओं का जायजा ले रहे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया है कि इस बार किसानों के लिए ऐसे मजबूत इंतजाम किए गए हैं कि उन्हें अपनी फसल बेचने में कोई परेशानी नहीं होगी।

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मंडियों में खरीद प्रक्रिया को लेकर आढ़तियों की अपनी अलग चिंताएं हैं। हरियाणा राज्य अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन के प्रदेश संयोजक हर्ष गिरधर ने बताया कि पिछले साल नमी के नाम पर आढ़तियों के करीब 80 करोड़ रुपये काट लिए गए थे। उन्होंने कहा कि निदेशालय में शिकायत के बाद करीब 30 हजार आढ़तियों को 12 करोड़ रुपये देने का आश्वासन तो मिला था, लेकिन आज तक वह बकाया रकम उन्हें नहीं मिल पाई है।

दूसरी तरफ किसान संगठन भी सरकारी दावों पर सवाल उठा रहे हैं। भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष रतन मान ने कहा कि मंडियों में अभी तक खरीद की पूरी व्यवस्था नहीं की गई है और शौचालय, सफाई व पीने के पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं मिल रही है। उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरसों की खरीद एक सप्ताह पहले ही शुरू हो जानी चाहिए थी, ताकि समय पर फसल बिकने से किसानों को बारिश के कारण नुकसान नहीं उठाना पड़ता।

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