Haryana: हरियाणा सरकार का बड़ा ऐलान, पानी बचाओ 8000 रुपये प्रति एकड़ पाओ

Published On: March 15, 2026
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Big announcement by Haryana government

Haryana: हरियाणा वासियों के लिए बड़ी खबर सामने आ रही है। हरियाणा सरकार ने बड़ा ऐलान कर दिया है जिसके तहत अब किसानों को 8000 रुपये प्रति एकड़ मिलने वाले है। सरकार द्वारा प्रदेश में जल संरक्षण को बढ़ावा देने और भूमिगत जल स्तर को सुधारने के उद्देश्य से कृषि विभाग की महत्वाकांक्षी योजना ‘मेरा पानी मेरी विरासत’ योजना चलाई जा रही है।

इस योजना के माध्यम से किसानों को धान की पारंपरिक फसल के स्थान पर कम पानी वाली वैकल्पिक फसलें उगाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य यह है कि धान जैसी अधिक पानी खपत करने वाली फसलों के स्थान पर ऐसी फसलें उगाई जाएं जिनमें पानी की कम आवश्यकता हो और किसानों को भी बेहतर आय प्राप्त हो सके।

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इस योजना के तहत जो किसान धान की फसल को छोड़कर उसकी जगह वैकल्पिक फसलों की बुवाई करेंगे, उन्हें सरकार की ओर से प्रति एकड़ 8000 रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। इससे न केवल किसानों को आर्थिक लाभ मिलेगा, बल्कि प्रदेश में तेजी से गिरते भूजल स्तर को बचाने में भी मदद मिलेगी।

योजना के अंतर्गत किसान धान के स्थान पर कपास, बाजरा, मक्का, ज्वार, बागवानी फसलें, सब्जियां, खरीफ की दालें, खरीफ तिलहन जैसी वैकल्पिक फसलें उगा सकते हैं। इसके अलावा यदि किसान खेत को खाली भी छोड़ते हैं तो भी उन्हें इस योजना का लाभ मिल सकता है। सरकार का मानना है कि इन फसलों की खेती से पानी की खपत कम होगी और कृषि व्यवस्था अधिक टिकाऊ बन सकेगी।

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इस योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकरण करवाना अनिवार्य है। पंजीकरण के दौरान किसानों को अपनी भूमि और बोई जाने वाली फसल का पूरा विवरण देना होता है। इसके आधार पर ही कृषि विभाग द्वारा पात्र किसानों को योजना का लाभ प्रदान किया जाता है।

कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों से अपील की है कि वे जल संरक्षण के महत्व को समझते हुए धान की खेती की जगह वैकल्पिक फसलों को अपनाएं और सरकार की इस योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाएं। इससे न केवल प्रदेश में पानी की बचत होगी, बल्कि किसानों की आय में भी वृद्धि संभव हो सकेगी।

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प्रदेश सरकार की यह पहल भविष्य की खेती को सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। विशेषज्ञों का भी मानना है कि यदि अधिक से अधिक किसान इस योजना से जुड़ते हैं तो हरियाणा में जल संकट की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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