महिलाओं के अधिकारों के मुद्दे पर कांग्रेस ने फिर दिखाया अपना असली चेहरा – मुख्यमंत्री

Published On: April 28, 2026
Follow Us

चंडीगढ़, 27 अप्रैल– हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने सोमवार को हरियाणा विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में सरकारी प्रस्ताव पेश किया। यह प्रस्ताव ध्वनि मत से पारित हुआ। मुख्यमंत्री ने प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि कोई भी क्षेत्र या समाज तब तक पूर्ण रूप से विकसित नहीं माना जा सकता, जब तक उसकी आधी आबादी माताओं और बहनों को सम्मान, समान अवसर और अधिकार नहीं मिलते। इसलिए ‘नारी सम्मान’ भारत की चिर-नूतन सभ्यता और संस्कृति की अटूट पहचान भी है तथा विकसित भारत-2047 के राष्ट्रीय संकल्प का मूल आधार भी है।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनाने के संकल्प का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके चार प्रमुख स्तंभों में महिलाओं को भी शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सक्रिय भागीदारी के बिना विकसित भारत का लक्ष्य प्राप्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में महिलाओं के सशक्तिकरण हेतु ठोस कदम उठाए गए हैं। वर्ष 2023 में संसद द्वारा पारित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह कानून संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने की दिशा में ऐतिहासिक पहल है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यद्यपि इस कानून के क्रियान्वयन की समयसीमा वर्ष 2034 निर्धारित की गई थी, तथापि इसे वर्ष 2029 तक लागू करने के उद्देश्य से 16 व 17 अप्रैल को संसद का विशेष सत्र आयोजित किया गया, जिसमें संबंधित संशोधन विधेयक प्रस्तुत किया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा की धरती ने भी अनेक प्रेरणादायक महिलाएं दी हैं। महारानी किशोरी, शिक्षाविद् बहन सुभाषिनी जी और अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला सहित प्रदेश की बेटियों ने खेलों में भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान से देशभर में सामाजिक चेतना का विस्तार हुआ है, जिसके परिणामस्वरूप लिंगानुपात में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। हरियाणा का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि राज्य का लिंगानुपात 871 से बढ़कर 923 हो गया है।

Weather Update: देशभर में मौसम का बड़ा अलर्ट, 20 से अधिक राज्यों में आंधी, तूफान और भारी बारिश की चेतावनी

मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘सुकन्या समृद्धि योजना’, ‘प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना’, ‘प्रधानमंत्री जन धन योजना’, ‘मुद्रा योजना’ तथा ‘स्टैंड-अप इंडिया’ जैसी योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया गया है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को सशस्त्र बलों में स्थायी कमीशन प्रदान किया गया है, सैनिक स्कूलों में बेटियों के प्रवेश को स्वीकृति दी गई है तथा राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में भी महिलाओं के लिए मार्ग प्रशस्त किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा में पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं को 50 प्रतिशत प्रतिनिधित्व प्रदान किया गया है। ‘लखपति दीदी’ एवं ‘ड्रोन दीदी’ जैसी योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है, जबकि ‘दीनदयाल लाडो लक्ष्मी योजना’ से आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है। ‘हर घर-हर गृहिणी योजना’ के तहत पात्र महिलाओं को 500 रुपये में रसोई गैस सिलेंडर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। महिला सुरक्षा के दृष्टिगत राज्य में 33 महिला पुलिस थाने स्थापित किए गए हैं तथा ‘दुर्गा शक्ति ऐप’ एवं हेल्पलाइन-1091 जैसी व्यवस्थाएं भी लागू की गई हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं की भागीदारी को निर्णय प्रक्रिया में शामिल करना आवश्यक है और संसद एवं राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण इस दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।

प्रस्ताव सुधार का अवसर था – मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि महिलाओं के अधिकारों के मुद्दे पर कांग्रेस ने एक बार फिर अपना असली चेहरा उजागर किया है। उन्होंने कहा कि जब भी महिलाओं के अधिकारों की बात आती है, कांग्रेस महत्वपूर्ण समय पर पीछे हट जाती है। उन्होंने कहा कि लोकसभा में जो रवैया देखने को मिला, वही विधानसभा में भी दोहराया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि आज का यह प्रस्ताव सुधार का अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से लाया गया था, ताकि यदि शीर्ष स्तर पर कोई चूक हुई है, तो उसे सुधारा जा सके।

Gold Silver Price: सोना-चांदी के भाव में आई तेजी, जानें 12 जून के ताजा दाम

बाहर बयानबाजी, अंदर वॉकआउट

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब महिलाओं के सशक्तिकरण जैसे महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा के लिए सदन बुलाया गया, तब विपक्ष ने वॉकआउट कर दिया। वे सदन के बाहर महिलाओं के अधिकारों की बात करते हैं, लेकिन अंदर चर्चा से बचते हैं, जो उनके दोहरे रवैये को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों का यह आचरण दर्शाता है कि वे महिलाओं के अधिकारों के प्रति गंभीर नहीं हैं। उनका यह रवैया केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि महिलाओं के अधिकारों के प्रति उदासीनता को दर्शाता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह विपक्ष के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर था कि वे इस प्रस्ताव का समर्थन कर अपने शीर्ष नेतृत्व को सकारात्मक संदेश देते, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। उन्होंने कहा कि जो लोग महिलाओं के अधिकारों की बात करते हैं, उन्हें अपने आचरण से भी इसे सिद्ध करना चाहिए। बाहर कुछ और कहना और अंदर चर्चा से बचना उनके दोहरे चरित्र को उजागर करता है।

विपक्ष के आचरण की निंदा की जानी चाहिए

Gold Silver Price: सोना-चांदी के भाव में आई गिरावट, चेक करें ताजा दाम

मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष को सदन में रहकर अपनी बात रखनी चाहिए थी और उसके बाद विरोध दर्ज कराना चाहिए था। उन्होंने कहा कि उनका इस प्रकार वॉकआउट करना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है और ऐसे आचरण की निंदा की जानी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्षों तक महिलाओं ने कांग्रेस का समर्थन किया, लेकिन जब उनके अधिकार सुनिश्चित करने का समय आया, तो कांग्रेस ने उनका साथ नहीं दिया, जो उनके विश्वास के साथ विश्वासघात है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह प्रस्ताव महिलाओं के सम्मान, अधिकार और भविष्य से जुड़ा हुआ है। उन्होंने सभी सदस्यों से आग्रह किया कि वे अपने राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर इस प्रस्ताव का समर्थन करें। यह प्रस्ताव केवल एक राजनीतिक पहल नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान और उत्थान के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है और इसे सर्वसम्मति से पारित किया जाना चाहिए।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment