चंडीगढ़, 30 अप्रैल। एकल मां के संघर्ष, ममता और अटूट हौसले ने बेटे को वह मुकाम दिलाया, जहां आज सफलता ने गोल्ड मेडल का रूप ले लिया। पीजीआई चंडीगढ़ के 39वें वार्षिक दीक्षांत समारोह में रेडियोडायग्नोसिस क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए डॉ. दमनदीप सिंह को गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया। अपनी इस उपलब्धि का श्रेय उन्होंने अपनी माता बलजीत कौर को दिया।
डॉ. दमनदीप सिंह की सफलता की कहानी आज समाज और युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है। बचपन से चिकित्सक बनने का सपना देखने वाले दमनदीप ने कठिन परिश्रम और दृढ़ संकल्प से यह उपलब्धि हासिल की। उन्होंने एम्स, नई दिल्ली से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की और इसके बाद पीजीआई चंडीगढ़ से रेडियोडायग्नोसिस में स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त की। वर्तमान में वे एम्स, नई दिल्ली में डीएम कार्डियोवैस्कुलर इमेजिंग एवं एंडोवास्कुलर इंटरवेंशन विभाग में सेवाएं दे रहे हैं।
डॉ. दमनदीप सिंह ने कहा कि उनकी माता ने अकेले दम पर परिवार की जिम्मेदारियां निभाईं और हर मोड़ पर उन्हें संभाला। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने कभी उनकी शिक्षा और सपनों के बीच रुकावट नहीं आने दी। मां ने हमेशा प्रोत्साहित किया और हर चुनौती में उनका साथ दिया। बलजीत कौर वर्तमान में महिला एवं बाल विकास विभाग में जिला स्तरीय अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। जिम्मेदारियों और चुनौतियों के बीच उन्होंने बेटे के उज्ज्वल भविष्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। मां का त्याग, अनुशासन और निरंतर प्रोत्साहन ही उनकी सफलता की सबसे बड़ी ताकत है।
बेटे की इस उपलब्धि पर भावुक हुई माता बलजीत कौर ने कहा कि यह उनके जीवन का सबसे बड़ा सम्मान और सबसे अनमोल उपहार है। यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि उस मातृशक्ति का सम्मान है, जो संघर्षों के बीच भी अपने बच्चों के सपनों को साकार करती है।













