दिव्यांग बच्चों का बढ़ाएं मनोबल ताकि वे आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़े और आत्मनिर्भर बनें: एसीएस डॉ. जी. अनुपमा

Published On: April 22, 2026
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सिरसा, 22 अप्रैल।
हरियाणा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. जी. अनुपमा ने कहा कि दिव्यांग बच्चों की क्षमता के अनुरूप उनमें कौशल विकसित करने के लिए सरकार लगातार प्रयासरत है। इस दिशा में पूरे प्रदेश में दिव्यांग बच्चों से संबंधित स्कूलों, संस्थानों में लगातार न केवल इंफ्रास्ट्रकचर सहित बुनियादी सुविधाएं और बढ़ाई जा रही हैं बल्कि उनमें कौशल विकसित करते हुए समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है।
अतिरिक्त मुख्य सचिव ने बुधवार को हेलन केलर दृष्टि बाधितार्थ विद्यालय तथा प्रयास स्कूल का निरीक्षण किया। इस दौरान उपायुक्त शांतनु शर्मा, अतिरिक्त उपायुक्त अर्पित संगल, विभाग के संयुक्त निदेशक अर्पित, जिला समाज कल्याण अधिकारी सत्यवान ढिलौड, जिला कल्याण अधिकारी राकेश कुमार तथा विद्यालय प्रिंसिपल राजेंद्र कुमार भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।


निरीक्षण के दौरान एसीएस डॉ. जी अनुपमा ने दोनों स्कूलों में बच्चों के बैठने की व्यवस्था, कक्षाओं की स्थिति और उपलब्ध सुविधाओं का बारीकी से जायजा लिया। उन्होंने निर्देश दिए कि विद्यार्थियों के स्वास्थ्य की समय-समय पर नियमित जांच सुनिश्चित की जाए ताकि उनके समग्र विकास में कोई बाधा न आए। उन्होंने लाइब्रेरी की स्थिति पर विशेष ध्यान देते हुए उसमें और सुधार लाने तथा बच्चों के लिए उपयोगी सामग्री बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान में अध्ययनरत तथा पूर्व में पढ़ चुके विद्यार्थियों का डाटा भी संग्रहित किया जाए, ताकि उनकी प्रगति का आंकलन के साथ-साथ भविष्य की योजनाएं बेहतर तरीके से तैयार की जा सकें। इसके साथ ही उन्होंने स्टाफ की संख्या, उनकी योग्यता, विषयवार जिम्मेदारियां और टाइम टेबल की भी जानकारी ली। इसके अलावा उन्होंने बच्चों को दी जा रही हॉस्टल सुविधा, भोजन व्यवस्था आदि का भी बारीकी से निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने कक्षाओं में जाकर बच्चों से भी संवाद करते हुए उनका हौसला बढ़ाया।
व्यापक कार्ययोजना करें तैयार ताकि प्रदेश में मॉडल स्कूल के रूप में मिले पहचान

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निरीक्षण के दौरान उन्होंने कहा कि इन दोनों संस्थानों को हरियाणा में एक मॉडल स्कूल के रूप में पहचाना जाए, इसके लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि दिव्यांग बच्चों का मनोबल बढ़ाना पहली प्राथमिकता होनी चाहिए, ताकि वे आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ते हुए आत्मनिर्भर बन सके। उन्होंने अभिभावकों की नियमित काउंसलिंग करने, स्कूल में नामांकन बढ़ाने और बच्चों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने पर जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि विद्यालयों में फंड की कोई कमी नहीं रहने दी जाएगी और आवश्यकतानुसार स्टाफ की भर्ती जल्द पूरी की जाएगी। उन्होंने निर्देश दिए कि जो बच्चे कंप्यूटर सीखने में सक्षम हैं, उन्हें विशेष रूप से कंप्यूटर शिक्षा प्रदान की जाए।


एसीएस ने यह भी कहा कि जो विद्यार्थी इन संस्थानों से शिक्षा प्राप्त कर आगे चलकर सफल हुए हैं या स्वयं का व्यवसाय कर रहे हैं, उनकी सक्सेस स्टोरी तैयार कर अन्य बच्चों को प्रेरित किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन स्कूलों के समग्र विकास के लिए एक ठोस और दीर्घकालिक कार्ययोजना तैयार की जाए, जिससे दिव्यांग विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा और अवसर मिल सकें।

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