विभागीय 5-वर्षीय कार्यान्वयन रोडमैप को लेकर मुख्यमंत्री ने की समीक्षा बैठक

Published On: April 29, 2026
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चंडीगढ़, 28 अप्रैल- हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्रदेश के हर विभाग को अपने कार्य के लिए 2030 तक के तय किए गए टारगेट को साल-दर-साल टाइमलाइन के साथ बनाएं। सिर्फ लक्ष्य बनाना ही काफी नहीं है, बल्कि उन्हें समय पर पूरा करना और उनकी नियमित समीक्षा करना भी जरूरी है, ताकि योजनाओं का फायदा सीधे लोगों तक पहुंच सके।

मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी मंगलवार को सचिवालय में स्वर्ण जयंती हरियाणा वित्तीय प्रबंधन संस्थान से संबंधित बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में विभागीय 5-वर्षीय कार्यान्वयन रोडमैप को लेकर अलग—अलग विभागों की समीक्षा की गई।

इस दौरान मुख्यमंत्री ने “विजन टू एक्शन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस” प्लानिंग टूल को भी लांच  किया। स्वर्ण जयंती हरियाणा वित्तीय प्रबंधन संस्थान के महानिदेशक डॉ. राज नेहरु ने मुख्यमंत्री को बताया कि इस टूल को एक्शन प्लान को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है। उद्देश्य यही है कि 5 साल के टारगेट क्लियर हो, साथ ही विभागों की रिपोर्ट भी यूनिफार्म जनरेट होगी। इसमें विभागों के लिए यह भी सहुलियत होगी कि उन्हें साल दर साल दिए जाने वाले लक्ष्यों का भी आसानी से पता लग सकेगा। ऐसे में विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में हरियाणा भी चरणबद्ध तरीके से योगदान दे पाएगा।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी के समक्ष अलग अलग विभागों के अधिकारियों ने 2026 से लेकर 2030 तक किए जाने वाले कार्यों का उल्लेख किया। इस दौरान मुख्यमंत्री को बताया गया कि इन 5 सालों में विभागों की क्या—क्या योजनाएं है।  जिन विभागों ने अपनी योजनाएं बताई उनमें उद्योग एवं वाणिज्य विभाग, स्कूल शिक्षा विभाग शामिल थे।

मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि आने वाले 5 साल बेहद अहम हैं और अगर योजनाओं को सही तरीके से लागू किया जाए, तो 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य आसानी से हासिल करते हुए हरियाणा, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के सपने को पूरा करने में अहम योगदान देगा। उन्होंने निर्देश दिए कि केंद्र सरकार के नीति आयोग के साथ सामंजस्य स्थापित करते हुए तमाम रिफॉर्म पर काम करें, ताकि  योजनाओं को सही और प्रभावी तौर पर लागू करते हुए अधिक से अधिक लाभ प्रदेशवासियों को मिल सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि समय कम है और लक्ष्य बड़े हैं, इसलिए सभी विभाग मजबूत योजना बनाकर काम करें। साथ ही यह भी देखें कि तय समय में योजनाओं का जमीनी स्तर पर कितना असर हुआ है या होने वाला है, इस पर लगातार नजर रखी जाए।

उन्होंने कहा कि सभी विभाग मिलकर बेहतर तरीके से काम करें, नई सोच अपनाएं और आगे की तैयारी पहले से करें, ताकि प्रदेश की तरक्की की रफ्तार और तेज हो सके।

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यह दिया एक्शन प्लान

मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने एक्शन प्लान संबंधित हिदायत देते हुए कहा कि आगामी 5 वर्षों की प्राथमिकताएं स्पष्ट रूप से निर्धारित की जाएं और उन्हें वर्ष-दर-वर्ष मापने योग्य बनाया जाए, ताकि प्रगति की नियमित समीक्षा संभव हो सके। उन्होंने कहा कि सभी समय-सीमाएं यथार्थवादी होने के साथ-साथ महत्वाकांक्षी भी हों और योजनाएं जमीनी स्तर पर वास्तविक बदलाव लाने वाली हों। मुख्यमंत्री ने विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने, लक्ष्यों के प्रति स्पष्ट जवाबदेही तय करने तथा एक मजबूत मॉनिटरिंग तंत्र विकसित करने पर जोर दिया, ताकि एक्शन प्लान का प्रभावी और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके।

विजन 2047 का लक्ष्य निर्धारित कर नई शिक्षा नीति के तहत शिक्षा विभाग कार्य करें

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी के समक्ष शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने भी विभाग के विजन के बारे में बताया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा विजन 2047 का लक्ष्य निर्धारित कर नई शिक्षा नीति के तहत विभाग अनुसार कार्य करें ताकि हर साल पूरी तत्परता से कार्य करते हुए वांछित लक्ष्य हासिल किया जा सके। इसके लिए उच्चतर शिक्षा पर विशेष फोकस किया जाए ताकि युवाओं को गुणवत्तायुक्त एवं रोजगारपरक शिक्षा सुलभ हो सके।   

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के विश्वविद्यालयों को देश भर के प्रतिष्ठित आईआईटी जैसे शिक्षित संस्थानों की तर्ज पर ग्रेडिंग में लाने के लिए नई शिक्षा नीति के तहत कार्य करें ताकि उच्च गुणवतायुक्त शिक्षा भी सुलभ करवाई जा सके। इसके अलावा उनके सौन्दर्यकरण पर भी विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विश्वविद्यालयों को अव्वल बनाने के लिए बेहतर कार्य करने वाले विश्वविद्यालयों को शिक्षा में सुधार करने के लिए 5-5 करोड़ रुपए की ग्रांट दी जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्वविद्यालयों में वर्ष 2047 तक सकल नामांकन अनुपात 50 प्रतिशत होना चाहिए जो वर्तमान में 31 प्रतिशत है। एनईपी में हर जिला स्तर पर मॉडर्न संस्कृति महाविद्यालय खोले जाएगें जिनका चयन कर लिया गया है। इनमें वर्ष 2028 तक आवश्यक कैम्पस तैयार किए जाएंगे। इसी प्रकार 50 प्रतिशत कौशल से संबंधित कोर्स शुरू किए जाऐंगे। शिक्षा नीति के तहत लाभ देने के लिए सभी आवश्यक एवं बेहतर सुविधाएं एक ही पोर्टल पर सुलभ करवाई जाए ताकि महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों की आसानी से ग्रेडिंग की जा सके।

श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि हरियाणा विजन 2047 के तहत बच्चों को उनके अधिकारों के बारे में श्रम विभाग के माध्यम से जागरूक एवं सचेत करने के लिए सदैव विशेष अभियान चलाया जाएगा। अल्पायु में ही बच्चेां को लोकल स्तर पर ज्ञानवर्धन करने के लिए अच्छे संस्थानों, उद्योगों व केन्द्रों का भ्रमण करवाया जाए तथा उच्च शिक्षा में लड़कियों की ड्रापआउट दर को कम करने पर बल दिया जाए। दिव्यांग बच्चों के लिए भी हर जिले में स्कूल खोलने के लिए कार्य किया जाए।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि हर स्कूल एवं कॉलेज की हर माह वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा मोनिटरिंग की जाएगी। शिक्षण संस्थानों में सिविल इन्फ्रा पेयजल, शौचालय, साइंस लैब, अतिरिक्त कक्ष आदि बढ़ाने के लिए आवश्यक कार्य किया जाएगा तथा कक्षा 8 से ही बच्चों में ज्ञान विकसित किया जाएगा ताकि उनकी कौशल क्षमता बढ़ सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं को तकनीकी शिक्षा में निपुण करने के लिए प्रदेश में चार नए पोलटेक्निक खोले जाएगें। इनमें गुरूग्राम, खेड़ी तलवाना महेन्द्रगढ तथा नारायणगढ के लिए जमीन का चयन कर लिया गया है। इसके अलावा महिलाओं को तकनीकि शिक्षा के लिए ज्यादा से ज्यादा प्रेरित किया जाएगा ताकि महिलाओं की तकनीकि कौशल दर को 17 से बढाकर 33 प्रतिशत किया जा सके।

5 हजार से अधिक नए स्टार्टअप पंजीकरण तथा 5 लाख करोड़ रुपये के निवेश का रखा लक्ष्य

बैठक के दौरान उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित अग्रवाल ने बताया कि “हरियाणा विजन 2047” के तहत राज्य को औद्योगिक विकास, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और नवाचार में अग्रणी बनाने के लिए एक व्यापक रोडमैप तैयार किया है। इस विजन का उद्देश्य हरियाणा को सतत, समावेशी और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी औद्योगिक हब बनाना है। उन्होंने कहा कि विभाग ने वर्ष 2030 तक एमएसएमई और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूत करने, लॉजिस्टिक्स सिस्टम को बेहतर बनाने और ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने के लक्ष्य तय किए हैं। स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए हर जिले में स्टार्टअप लायजन अधिकारी नियुक्त किए जा रहे हैं और 5 हजार से अधिक नए स्टार्टअप पंजीकरण का लक्ष्य रखा गया है।

उद्योगों को सरल और तेज सेवाएं देने के लिए 30 मई 2026 तक सिंगल विंडो सिस्टम 2.0 लागू किया जाएगा, जिससे स्वीकृति समय में 50 प्रतिशत तक कमी आएगी। साथ ही, नियमों को आसान बनाकर एमएसएमई के लिए अनुपालन बोझ कम करने और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को और मजबूत करने पर जोर दिया गया है।

डॉ. अमित अग्रवाल ने कहा कि राज्य सरकार क्लस्टर आधारित औद्योगिक विकास, PADMA योजना, प्लग-एंड-प्ले इंफ्रास्ट्रक्चर और सोलर रूफटॉप जैसी पहलों के जरिए आधुनिक और टिकाऊ औद्योगिक ढांचा तैयार कर रही है। इसके साथ ही PPP मॉडल के तहत लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी को भी मजबूती दी जा रही है।

उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर हरियाणा की पहचान मजबूत करने के लिए अंतरराष्ट्रीय रोड शो, ब्रांडिंग अभियान और निवेशक सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे, जिससे 2030 तक निर्यात को दोगुना करने का लक्ष्य हासिल किया जा सके।

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युवाओं को रोजगार के अवसर देने के लिए 100 स्किल सेंटर स्थापित किए जाएंगे और उद्योगों के साथ मिलकर प्रशिक्षण व प्लेसमेंट पर फोकस किया जाएगा। साथ ही, एमएसएमई के लिए डिजिटल मार्केटप्लेस और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म विकसित किए जाएंगे, जिससे उनके उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार मिल सके। इसके अलावा, सरकार द्वारा एमएसएमई के लिए आसान ऋण, क्रेडिट गारंटी, वेंचर कैपिटल फंड और टैक्स प्रोत्साहन जैसी वित्तीय सहायता योजनाएं लागू की जा रही हैं।

उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित अग्रवाल ने कहा कि प्रदेश सरकार ने 2030 तक करीब 5 लाख करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य तय किया है, इन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से हरियाणा औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में नई ऊंचाइयों को हासिल करेगा।

बैठक के दौरान हरियाणा के मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री अरुण गुप्ता, गृह सचिव श्री सुधीर राजपाल, पुलिस महानिदेशक श्री अजय सिंघल सहित विभिन्न विभागों के उच्च अधिकारी मौजूद रहे।

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