गेहूं फसल के अवशेष जलाने वाले किसानों के विरुद्ध दर्ज करवाये एफआईआर :- उपायुक्त सचिन गुप्ता

Published On: April 29, 2026
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रोहतक, 28 अप्रैल : उपायुक्त सचिन गुप्ता ने कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिये कि वे जिला में गेहूं फसल के अवशेष जलाने वाले किसानों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करवाये। उन्होंने कहा कि पुलिस द्वारा गश्त बढ़ाई जाये ताकि ऐसी घटनाएं न हों।


सचिन गुप्ता स्थानीय कैंप कार्यालय के सभागार में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा माडौधी जाटान गांव में किसानों को धान की सीधी बिजाई करने के लिए प्रोत्साहित किया जाये तथा जिला में किसानों को मेरा पानी-मेरी विरासत योजना के तहत फसल विविधीकरण अपनाने बारे जागरूक किया जाये। उन्होंने कहा कि किसानों को फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन करने बारे प्रोत्साहित किया जाये। उन्होंने कहा कि जिला के आसन, रिठाल फौगाट, किलोई खास व किलोई दोपाना में सब सरफेस ड्रेनेज का कार्य शुरू कर दिया गया है, जिसके तहत इन गांवों में सेम की समस्या का समाधान किया जायेगा।

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उपायुक्त सचिन गुप्ता ने कहा कि जिला के कलानौर कलां तथा माडौधी जाटान-रागडान क्षेत्र (लवणीयता) से प्रभावित कृषि भूमि के सुधार हेतु लगभग साढे चार करोड़ रुपये की परियोजना पर कार्य किया जा रहा है। इस परियोजना के तहत वर्टिकल ड्रेनेज सिस्टम लागू करते हुए भूमिगत पाइपलाइन बिछाई जाएगी, जिससे जमीन के भीतर जमा खारे पानी को बाहर निकाला जा सकेगा। उन्होंने कहा कि गांव कलानौर कलां और माडौधी जाटान-रागडान की क्रमश: 1500-1500 एकड़ कृषि भूमि में लवणीयता की गंभीर समस्या है तथा भूमिगत पानी भी खारा है। इस कारण इन क्षेत्रों में फसलों का उत्पादन प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि गेहूं कटाई सीजन के बाद इन दोनों गांवों में 20-20 सोलर आधारित ड्रेनेज ट्यूबवेल स्थापित किए जाएंगे। इन ट्यूबवेल के माध्यम से भूमिगत खारे पानी को निकालकर ड्रेन में डाला जाएगा। इस प्रणाली से जहां भूजल स्तर नियंत्रित होगा, वहीं मिट्टी में नमक की मात्रा भी कम होगी, जिससे भूमि की उर्वरक क्षमता में सुधार आएगा और कृषि उत्पादन बढ़ेगा।


सचिन गुप्ता ने भूमि की सेहत सुधारने पर विशेष जोर देते हुए कहा कि जिला की कृषि भूमि में ऑर्गेनिक कार्बन एवं अन्य पोषक तत्वों की कमी पाई जा रही है। उन्होंने किसानों का आह्वान किया कि वे भूमि की उर्वरता बढ़ाने के लिए जैविक उपायों को अपनाएं। उन्होंने कहा कि किसान प्रत्येक वर्ष कम से कम एक बार केंचुआ खाद, गोबर की खाद तथा बायोगैस स्लरी का उपयोग करें। इसके अलावा खरीफ फसल से पहले ढैंचा, जंतर या मूंग जैसी हरी खाद वाली फसलों को खेत में मिलाकर उपयोग करें, ताकि मिट्टी में पोषक तत्वों की पूर्ति हो सके।
बैठक में अतिरिक्त उपायुक्त नरेंद्र कुमार, पुलिस उपाधीक्षक गुलाब सिंह, मंडल मृदा संरक्षण अधिकारी डॉ. नीना सहवाग, कृषि उप निदेशक डॉ. सुरेंद्र मलिक, सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता अरूण मुंजाल, जिला मत्स्य अधिकारी आशा हुड्डा, जिला उद्यान अधिकारी डॉ. मदनलाल, पशुपालन विभाग के एसडीओ डॉ. नरेंद्र दहिया, एसडीएओ संदीप सिंह के अलावा अनिल अहलावत, विकास कुमार, डॉ. रूपेंद्र, दीपक सिंह, सोमवीर, दिलबाग सिंह सहित अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

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