ज्योतिबा फुले समाज सेवा के नायक, बाबा साहेब के जीवन से लें कठिन परिस्थितियों में भी सफलता की सीख- मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी

Published On: April 25, 2026
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चंडीगढ़, 24 अप्रैल – हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि सरकार बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर और महात्मा ज्योतिबा फुले के विचारों को आगे बढ़ाने के लिए कृतसंकल्प हैं। इसलिए हमें बाबा साहेब के जीवन से कठिन परिस्थितियों में भी सफलता की सीख लेनी और ज्योतिबा फुले के जीवन से समाज सेवा की प्रेरणा लेनी चाहिए।

मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी हरियाणा सिविल सचिवालय परिसर में कर्मचारी एवं अधिकारी संगठनों द्वारा आयोजित ज्योतिबा फुले एवं बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर जंयती समारोह को सम्बोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इन दोनों महापुरुषों के दिखाए रास्ते पर चलते हुए प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में हरियाणा में डबल इंजन सरकार ने समाज के हर वर्ग के उत्थान के लिए अनेक योजनाएं और नीतियां लागू कर गरीब व्यक्ति के उत्थान के लिए काम किया जा रहा है। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें इन महान विभूतियों के विचारों को केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं रखना, बल्कि उन्हें अपने व्यवहार और नीतियों में भी उतार कर शिक्षा में असमानता, सामाजिक भेदभाव और आर्थिक विषमता जैसी समाजिक चुनौतियां का सामना करना हैं। इन सबका समाधान हमें इन्हीं महापुरुषों के दिखाए मार्ग पर चलने से ही मिलेगा।

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श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि दोनों महापुरुषों के काम और विचार पर जब भी मंथन करेंगे तो पाएंगे कि महात्मा फुले जो काम अधूरा छोड़ गए थे, उन्हें डा. अंबेडकर ने न केवल आगे बढ़ाया, बल्कि संविधान में प्रावधान करके उसे अंजाम तक पहुंचाया। इस तरह ये दोनों महापुरुष एक ही सामाजिक चेतना की दो कड़ियाँ हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि महात्मा ज्योतिबा फुले और भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने अपना संपूर्ण जीवन समाज के उस वर्ग के उत्थान में लगाया, जिसे सदियों तक उपेक्षित और वंचित रखा गया। इसलिए इन दोनों को ही दबे-कुचले अवाम की आवाज कहा जाता है। महात्मा ज्योतिबा फुले जी ने 19वीं शताब्दी में छुआछूत, अज्ञानता और अंधविश्वास का अंधकार मिटाने के लिए शिक्षा को सबसे बड़ा हथियार बनाया। उन्होंने न केवल स्वयं शिक्षित होने का मार्ग अपनाया, बल्कि समाज में महिलाओं और उपेक्षित वर्ग को भी शिक्षा से जोड़ने का महान कार्य किया। ज्योतिबा फुले ने अपनी पत्नी श्रीमती सावित्रीबाई फुले के साथ मिलकर भारत का पहला बालिका विद्यालय शुरू किया, जो उस समय एक क्रांतिकारी कदम था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी प्रकार बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने शिक्षा, समानता और न्याय को अपने जीवन का मूल मंत्र बनाया। उन्होंने ‘शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो’ का नारा दिया। यह केवल एक नारा नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का उद्घोष था। बाबा साहेब ने अपने जीवन में अनेक कठिनाइयों का सामना किया, लेकिन कभी भी अपने उद्देश्य से विचलित नहीं हुए। उन्होंने भारत के संविधान का निर्माण कर देश को एक मजबूत लोकतांत्रिक ढांचा दिया, जिसमें प्रत्येक नागरिक को समान अधिकार और समान अवसर सुनिश्चित किए गए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि महात्मा फुले और बाबा साहेब के विचारों में एक अद्भुत समानता है। दोनों ने ही जाति-पाति एवं छुआछूत, असमानता, अन्याय और शोषण के विरुद्ध संघर्ष किया। दोनों ने शिक्षा को समाज सुधार का आधार माना, दोनों ने दलित वर्गों से उस समय हो रहे सामाजिक भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई। दोनों ने ही, एक ऐसे भारत का सपना देखा, जहां हर व्यक्ति को सम्मान और समान अवसर मिलें।

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श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि बाबा साहेब व ज्योतिबा फुले वंचित वर्गों की ही नहीं, महिलाओं की स्थिति में सुधार लाने के लिए भी समर्पित थे। वे समाज-सुधार के क्षेत्र में एवं पारिवारिक सुख शांति की दृष्टि से नारी-पुरुष दोनों को समान मानते थे। वे नारी-शिक्षा के प्रबल समर्थक थे। उनका मत था कि शिक्षा ही उनको आत्मनिर्भर बना सकती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि महात्मा फुले ने समाज में व्याप्त कुरीतियों को चुनौती दी, तो बाबा साहेब ने उन कुरीतियों को समाप्त करने के लिए एक मजबूत संवैधानिक ढांचा तैयार किया। यह कहना गलत नहीं होगा कि जहां महात्मा फुले ने सामाजिक चेतना का दीप जलाया, वहीं बाबा साहेब ने उस दीप को संविधान के माध्यम से प्रकाश स्तंभ में बदल दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस प्रकार ज्योतिबा फूले के मिशन का बाबा साहेब ने अनुसरण किया। उसी प्रकार बाबा साहेब के दिए मार्ग पर चल कर सरकार तेज गति से कार्य कर ही है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी गरीब परिवारों के लिए जो योजनाएं लेकर आते हैं उनमें बाब

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