हरियाणा में फ्री डायलिसिस सेवाओं का विस्तार, नए केंद्रों के लिए दो सप्ताह की समय-सीमा तय

Published On: April 24, 2026
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चंडीगढ़, 24 अप्रैल- हरियाणा सरकार ने महर्षि च्यवन सरकारी मेडिकल कॉलेज कोरियावास, नारनौल और श्री अटल बिहारी वाजपेयी सरकारी मेडिकल कॉलेज छायंसा, फरीदराबाद में निःशुल्क डायलिसिस सेवाओं के विस्तार को मंजूरी प्रदान की है। यह निर्णय बजट घोषणाओं को समयबद्ध तरीके से जमीनी स्तर पर लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

हरियाणा के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने छायंसा और कोरियावास के सरकारी मेडिकल कॉलेजों को निर्देश दिए हैं कि वे पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के तहत आगामी दो सप्ताह के भीतर डायलिसिस सेवाएं प्रारंभ करें। इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किडनी रोगियों को आवश्यक उपचार समय पर और सुगमता से उपलब्ध हो सके।

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उन्होंने बताया कि 18 अक्टूबर, 2024 से सरकारी अस्पतालों में निःशुल्क डायलिसिस सेवा शुरू होने के बाद से अब तक राज्य के 22 संस्थानों में 2.60 लाख से अधिक डायलिसिस सत्र संचालित किए जा चुके हैं, जिन पर 57 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हुए है। इस पहल से नियमित डायलिसिस पर निर्भर मरीजों को आर्थिक रूप से बड़ी राहत मिली है, क्योंकि यह उपचार अत्यंत महंगा और दीर्घकालिक होता है।

डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि यह विस्तार मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी द्वारा 2 मार्च, 2026 को प्रस्तुत बजट में की गई घोषणा के अनुरूप किया जा रहा है, जिसमें सरकारी मेडिकल कॉलेजों एवं उपमंडलीय अस्पतालों में 18 नए डायलिसिस केंद्र स्थापित करने का प्रावधान किया गया था।

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उन्होंने बताया कि वर्तमान में पीपीपी मॉडल के तहत पीजीआईएमएस रोहतक, एसएचकेएम सरकारी मेडिकल कॉलेज नल्हर, बीपीएस सरकारी मेडिकल कॉलेज खानपुर कलां, सोनीपत तथा कल्पना चावला सरकारी मेडिकल कॉलेज, करनाल सहित कई प्रमुख संस्थानों में डायलिसिस सेवाएं सफलतापूर्वक संचालित की जा रही हैं। ये केंद्र मरीजों को गुणवत्तापूर्ण और विश्वसनीय उपचार प्रदान कर रहे हैं।

इस विस्तार से विशेष रूप से ग्रामीण और छोटे शहरों के मरीजों को लाभ मिलेगा, क्योंकि उनकी यात्रा दूरी और प्रतीक्षा समय में कमी आएगी। सेवाओं को स्थानीय स्तर तक पहुंचाकर राज्य सरकार का उद्देश्य डायलिसिस पर निर्भर परिवारों के शारीरिक और आर्थिक बोझ को कम करना है।

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